पेरिस ओलंपिक 2024: मनु भाकर ने किया फाइनल में प्रवेश, मनमोहक वापसी की तैयारी

पेरिस ओलंपिक 2024: मनु भाकर ने किया फाइनल में प्रवेश, मनमोहक वापसी की तैयारी
Anuj Kumar 27 जुलाई 2024 20

पेरिस ओलंपिक 2024: मनु भाकर का चमकता प्रदर्शन

भारतीय शूटर मनु भाकर पेरिस ओलंपिक 2024 के 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय खेल प्रेमियों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। टोक्यो ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, यह उनका बड़ा वापसी का क्षण है। भाकर ने 580 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालिफाई किया है। यह उनकी अद्वितीय प्रतिभा और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

फाइनल तक का सफर

मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में एक मजबूत शुरुआत की थी, जिसमें उन्होंने पहले चार शृंखलाओं में कोई भी शॉट 9 से नीचे नहीं मारा। उन्होंने 27 इनर 10s बनाए, जो इस इवेंट में सबसे अधिक थे। पांचवीं शृंखला में थोड़ी मुश्किल का सामना करने के बावजूद, उन्होंने अपने स्कोर को बनाए रखा और तीसरे स्थान पर फाइनल के लिए क्वालिफाई किया।

यह फाइनल मुकाबला रविवार को होगा, जिसमें विश्व की शीर्ष शूटरों का मुकाबला देखने को मिलेगा। इनमें चीन की मौजूदा विश्व चैंपियन जियांग रैंक्सिन, ली झुए, दक्षिण कोरिया की किम येजिन और ओह ये जिन, और तुर्की की सेववाल इलायदा तारहान शामिल हैं।

मनु भाकर की कहानी: असफलता से सफलता तक

मनु भाकर की यह सफलता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उनकी मानसिक मजबूती। टोक्यो ओलंपिक में, उन्होंने एक खराब बंदूक के कारण दिल तोड़ने वाली हार का सामना किया था, जिससे उनके अन्य इवेंट्स भी प्रभावित हुए थे। इस असफलता के बावजूद, भाकर ने अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा और अपनी कमियों पर काम किया।

टोक्यो ओलंपिक में जो हार झेली थी, उसे उन्होंने अपनी ताकत बनाया। बंदूक की खराबी के बावजूद, उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत किया। उनके कोच और परिवार ने भी उनका पूरा समर्थन किया, जिससे उन्होंने इस कठिन समय को पार कर अपनी वापसी की नींव रखी।

भारतीय खेल जगत को उम्मीदें

मनु भाकर की यह सफलता भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है। उनके प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय शूटर भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी सफलता दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना कोई साधारण बात नहीं है। यह उन लाखों युवा शूटरों के लिए एक उदाहरण है जो ओलंपिक में भाग लेने का सपना देखते हैं। भाकर की कहानी उन नवोदित खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ता से किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।

अंतिम चरण की तैयारियाँ

अंतिम चरण की तैयारियाँ

रविवार को होने वाले फाइनल के लिए मनु भाकर ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। यह मुकाबला उनके और उनके समर्थकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण अवसर होगा। भारतीय शूटिंग टीम के कोच और खिलाड़ियों का विश्वास भी उन पर बना हुआ है।

भाकर की तैयारीयों में ध्यान, योग और मानसिक धैर्य का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने पिछले महीनों में जिस तरह से खुद को तैयार किया है, वह उनकी मजबूत मानसिकता और खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आगे की उम्मीदें और सपने

भविष्य में मनु भाकर और अधिक सफलता हासिल करने की ओर अग्रसर होंगी। उन्हें न केवल भारत में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनकी कहानी ने यह साबित कर दिया है कि असफलता एक सीढ़ी है सफलता की ओर, और कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

इस समय, पूरा देश उनकी सफलता के लिए उत्साहित है और सभी की नजरें रविवार को होने वाले फाइनल पर टिकी हुई हैं। हमें उम्मीद है कि मनु भाकर इस फाइनल में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगी और देश का नाम रोशन करेंगी।

यह सफर उनके लिए और सभी भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक शिक्षण का मौका है कि हार से नहीं, बल्कि उससे मिली शिक्षा से दुनिया जीती जाती है।

20 टिप्पणि

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    Vitthal Sharma

    जुलाई 29, 2024 AT 15:18
    बहुत अच्छा किया मनु भाईया 😊
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    ashi kapoor

    जुलाई 30, 2024 AT 15:56
    ओहो तो फिर से वो ही चीज़ जो हमेशा से होती है - एक भारतीय खिलाड़ी असफलता के बाद वापसी करती है और पूरा देश उसे भगवान बना देता है... लेकिन जब वो जीत जाएगी तो क्या होगा? क्या वो अब भी उसकी बंदूक की खराबी की वजह से रोएंगे? 😅 ये देश तो सिर्फ ड्रामा देखने के लिए नहीं, बल्कि असली तैयारी के लिए भी तैयार होना चाहिए।
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    Yash Tiwari

    जुलाई 31, 2024 AT 02:37
    यहाँ तक कि एक शूटर के लिए भी, एक बंदूक की खराबी को असफलता का कारण बनाना एक अस्थायी आत्मविश्वास का संकेत है। वास्तविक चैंपियन उन बाधाओं को अपने नियंत्रण में ले आते हैं - बंदूक खराब हो, तापमान बदल जाए, या दर्शकों का शोर हो, वो अपनी शुद्धता बनाए रखते हैं। मनु भाकर के प्रदर्शन में तो बस एक अच्छी तैयारी दिख रही है, लेकिन विश्व स्तर पर जीतने के लिए इससे कहीं अधिक चाहिए - वह अपने मन को एक बंदूक की तरह स्थिर करना सीखे।
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    Mansi Arora

    अगस्त 1, 2024 AT 05:20
    मनु भाकर ने जो किया है वो बहुत अच्छा है... लेकिन ये सब टोक्यो के बाद का बहाना है ना? अगर बंदूक खराब हुई तो टीम के पास क्या था? बस एक फोन कॉल? इस देश में तो एक खिलाड़ी की बंदूक खराब हो जाए तो पूरा देश उसके लिए रोने लगता है... लेकिन अगर उसका बैग खो जाए तो कोई नहीं पूछता। असली समस्या तो इंफ्रास्ट्रक्चर है ना? 😒
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    sneha arora

    अगस्त 2, 2024 AT 03:01
    मनु भाईया तो बहुत बहादुर हैं ❤️❤️ टोक्यो के बाद भी उठ गईं... ये देश के लिए गर्व की बात है 🙏✨
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    Sagar Solanki

    अगस्त 2, 2024 AT 16:16
    ये सब फाइनल का ड्रामा किसके लिए है? क्या आपने कभी सोचा कि ओलंपिक में शूटिंग के लिए जो बंदूकें इस्तेमाल होती हैं, उनका डिज़ाइन अमेरिका और चीन के लिए बनाया गया है? भारतीय शूटर्स को इन बंदूकों के साथ अपनी बॉडी एडजस्ट करनी पड़ती है - ये कोई खेल नहीं, ये एक इम्पीरियलिस्टिक असमानता है। और अब ये लोग कह रहे हैं कि मनु ने अपनी मानसिकता बदल ली? नहीं भाई, उसने बस अपने बॉडी को अमेरिकी बंदूक के अनुकूल बना लिया है।
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    Siddharth Madan

    अगस्त 4, 2024 AT 16:00
    अच्छा काम किया। देश के लिए गर्व की बात है।
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    Nathan Roberson

    अगस्त 5, 2024 AT 10:06
    मनु भाकर का ये फाइनल में पहुंचना बस शूटिंग के लिए नहीं, बल्कि हर उस बच्चे के लिए है जो अपने घर में बैठकर अपनी बंदूक बनाता है और सपना देखता है। ये एक जीत है जिसका कोई बड़ा स्टेडियम नहीं, बस एक छोटी सी आत्मा है जो अब जानती है - तुम अकेले नहीं हो।
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    Thomas Mathew

    अगस्त 6, 2024 AT 19:07
    मनु भाकर ने जो किया है वो बहुत बड़ी बात है... लेकिन जब तक देश के खिलाड़ियों को बिना बंदूक के भी जीतने का मौका नहीं मिलेगा, तब तक ये सब बस एक फिल्म की तरह है - जिसमें आप रोएंगे, फिर अगले दिन भूल जाएंगे। ये देश को एक बार फिर से एक जादूगर की जरूरत है, जो बंदूक नहीं, बल्कि भाग्य बदल दे।
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    Dr.Arunagiri Ganesan

    अगस्त 8, 2024 AT 16:27
    ये जो जीत है ये सिर्फ मनु की नहीं, ये हर उस गांव की बच्ची की है जो अपने घर के बाहर खड़ी होकर टारगेट बनाती है। ये एक नई शुरुआत है।
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    simran grewal

    अगस्त 9, 2024 AT 07:21
    अरे ये सब फिर से शुरू हो गया... एक लड़की ने फाइनल में जगह बना ली और अब सब उसे गॉड बना रहे हैं? टोक्यो में जब वो गिरी तो किसने उसके लिए लिखा था? क्या तुम्हारे घर में बंदूक खराब हो गई तो तुम भी देश के लिए गर्व करोगे? ये सब बस एक रिपोर्टिंग का खेल है।
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    Vinay Menon

    अगस्त 9, 2024 AT 21:21
    मनु की ये वापसी बहुत खास है। जब तुम दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट में अपनी असफलता को अपनी ताकत बना लो, तो वो कोई साधारण जीत नहीं होती।
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    Monika Chrząstek

    अगस्त 11, 2024 AT 13:34
    मनु भाकर ने जो किया है वो बहुत बड़ी बात है... मैं भी एक शूटर हूँ और जानती हूँ कि इतनी मेहनत कैसे होती है। बहुत बधाई 🙏❤️
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    chandra aja

    अगस्त 13, 2024 AT 01:27
    फाइनल में जाने का मतलब जीतना है? नहीं भाई, ये तो बस एक शो है। अगर वो जीत गई तो फिर भी लोग कहेंगे कि बंदूक ठीक थी। अगर हार गई तो कहेंगे कि दिमाग खराब हुआ। ये देश तो असली जीत को नहीं, बस ड्रामा को पसंद करता है।
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    Sutirtha Bagchi

    अगस्त 14, 2024 AT 03:47
    मनु भाकर तुम बहुत बहादुर हो मैं तुम्हारी दीवानी हूँ ❤️❤️❤️ तुम जीतोगी मैं जानती हूँ तुम जीतोगी
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    Abhishek Deshpande

    अगस्त 14, 2024 AT 13:35
    मनु भाकर के फाइनल में पहुँचने के बाद, उनके प्रदर्शन के आंकड़े - 580 स्कोर, 27 इनर 10s - इस इवेंट के इतिहास में अत्यंत उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा, उनके लिए एक बंदूक की खराबी का असर उनके मानसिक चेतना पर गहरा प्रभाव डाला है, जिसका विश्लेषण एक व्यावहारिक नैतिक दृष्टिकोण से भी किया जाना चाहिए।
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    vikram yadav

    अगस्त 16, 2024 AT 07:56
    मनु भाकर की ये वापसी सिर्फ एक शूटर की नहीं, बल्कि एक देश की उम्मीदों की वापसी है। जब तुम अपनी बंदूक के साथ नहीं, बल्कि अपने दिल के साथ शूट करते हो, तो दुनिया भी तुम्हें सुनती है।
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    Tamanna Tanni

    अगस्त 17, 2024 AT 07:45
    हर भारतीय लड़की के लिए मनु एक रास्ता है। उसकी मेहनत दिखाती है कि अगर तुम लगातार चलोगे तो दुनिया तुम्हारा रास्ता बना देगी।
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    Rosy Forte

    अगस्त 19, 2024 AT 06:43
    मनु भाकर की ये वापसी एक निर्मम वास्तविकता को उजागर करती है - जब तक भारतीय खिलाड़ियों को अपनी जगह पर खड़े होने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक ये सब बस एक सामाजिक नाटक है। एक शूटर की बंदूक खराब हो जाए, और पूरा देश उसे नायक बना दे - ये नायकत्व का नाम है या बेकारी का नाम? जब तक ये व्यवस्था नहीं बदलेगी, तब तक ये सब एक भावुक झूठ है।
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    Yash Tiwari

    अगस्त 20, 2024 AT 20:29
    उस टिप्पणी को जिसने बंदूक के डिज़ाइन की बात की, वो बिल्कुल सही है। लेकिन ये भी सच है कि जो खिलाड़ी अपने अंदर की शक्ति को बाहर निकाल लेता है, वो बंदूक की बजाय अपने दिमाग से जीतता है। मनु ने अपने अंदर के दुश्मन को हराया - ये वाकई एक चैंपियन का काम है।

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