Jio Financial Services का 36,000 करोड़ का बड़ा सौदा: Reliance Retail से खरीदेगा टेलिकॉम उपकरण

Jio Financial Services का 36,000 करोड़ का बड़ा सौदा: Reliance Retail से खरीदेगा टेलिकॉम उपकरण
Anuj Kumar 25 मई 2024 15

Jio Financial Services का बड़ा कदम

भारत की अग्रणी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो की सहायक कंपनी, Jio Financial Services Limited (JFSL), ने एक महत्वपूर्ण व्यापारिक कदम उठाया है। Jio Leasing Services Limited (JLSL) ने रिलायंस रिटेल से 36,000 करोड़ रुपये की कीमत के टेलिकॉम उपकरण खरीदने का निर्णय लिया है। यह सौदा अगले दो वित्तीय वर्षों में, मार्च 2025 और मार्च 2026 तक पूरा होगा।

कैसे होगा उपकरणों का उपयोग

यह महत्वपूर्ण सौदा रिलायंस जियो के ग्राहकों को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। JLSL द्वारा खरीदे गए उपकरणों को ऑपरेटिंग लीज के माध्यम से ग्राहकों को प्रदान किया जाएगा। इस मॉडल को Devices-as-a-Service (DaaS) कहा जाता है। DaaS मॉडल में इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस, सपोर्ट और लगातार अपडेट्स शामिल होंगे, जो ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त तनाव के उच्च गुणवत्ता की सेवाएं प्रदान करेगा।

रिलायंस रिटेल की प्रमुख भूमिका

रिलायंस रिटेल की प्रमुख भूमिका

इस सौदे में रिलायंस रिटेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। रिलायंस रिटेल पहले से ही CPE (Customer Premises Equipment), एंटरप्राइज़ डिवाइसेज़ और अन्य टेलिकॉम उपकरणों के व्यवसाय में है। रिलायंस रिटेल बड़ी मात्रा में उपकरणों की खरीद करेगी, जिससे उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक भाव पर मिलेगा। इन उपकरणों को फिर JLSL को एक cost-plus margin पर प्रदान किया जाएगा।

ग्राहकों के लिए क्या फायदे

Jio के लिए इस सौदे का मुख्य उद्देश्य अपने ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं प्रदान करना है। DaaS मॉडल के तहत, ग्राहकों को न सिर्फ नए उपकरण मिलेंगे, बल्कि उनकी इंस्टॉलेशन और मेन्टेनेंस भी कंपनी द्वारा ही की जाएगी। इससे ग्राहकों को उपकरण की ख़राबी या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें हमेशा अपडेटेड उपकरण मिलेंगे। रिलायंस जियो की वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और अन्य सेवाओं का अनुभव और बेहतरीन होगा।

आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सौदा

यह सौदा रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी आर्थिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। Jio Financial Services और Reliance Retail दोनों ही कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधीन आती हैं, जिससे यह सौदा समूह के भीतर ही हो रहा है। इस प्रकार, यह सौदा रिलायंस इंडस्ट्रीज की समग्र व्यापारिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समूह की कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित करना और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।

सौदे की समयसीमा

यह सौदा अगले दो वित्तीय वर्षों में, मार्च 2025 और मार्च 2026 तक पूरा होगा। इस दौरान रिलायंस रिटेल द्वारा आवश्यक उपकरणों की खरीदारी और उनकी डिलीवरी का सारा कार्य ठीक से संपन्न किया जाएगा।

निष्कर्ष

निष्कर्ष

इस साझेदारी से न केवल रिलायंस जियो के ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता की सेवाएं मिलेंगी, बल्कि टेलिकॉम उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। यह सौदा भारत के टेलिकॉम उद्योग में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

15 टिप्पणि

  • Image placeholder

    Debakanta Singha

    मई 26, 2024 AT 00:03
    ये DaaS मॉडल असल में ग्राहकों के लिए बहुत अच्छा है। जब तक उपकरण ठीक चल रहे हों और मरम्मत का कोई झंझट न हो, तो लोग खुश रहेंगे।
  • Image placeholder

    tejas cj

    मई 27, 2024 AT 19:44
    अरे ये सब बकवास है। Reliance ने अपने ही हाथों से पैसा घुमाया है और इसे बड़ा सौदा बता रहे हैं। ग्राहक को क्या फर्क पड़ता है?
  • Image placeholder

    Payal Singh

    मई 29, 2024 AT 08:06
    मैं इस सौदे को बहुत सकारात्मक ढंग से देखती हूँ। ये एक ऐसा निर्णय है जो ग्राहकों की ज़िंदगी आसान बनाएगा। जब तक वो अपडेट और सपोर्ट मिलते रहेंगे, तब तक लोग बेहतर सेवा पाएंगे।
  • Image placeholder

    Chandrasekhar Babu

    मई 31, 2024 AT 00:06
    DaaS एक वास्तविक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का उदाहरण है। इसमें CapEx को OpEx में ट्रांसफॉर्म किया जा रहा है, जिससे स्केलेबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी में बड़ी बढ़ोतरी हो रही है।
  • Image placeholder

    Liny Chandran Koonakkanpully

    जून 1, 2024 AT 11:19
    अब तो Reliance ने खुद को एक साम्राज्य बना लिया है। जियो के लिए उपकरण खरीदने के लिए रिटेल का इस्तेमाल करना? ये तो अंदरूनी लेन-देन है। ग्राहकों को इसका फायदा होगा? नहीं, बस नाम का बड़ा बयान है। 😒
  • Image placeholder

    Manu Metan Lian

    जून 2, 2024 AT 21:18
    यह व्यवहार भारतीय उद्योग के लिए अत्यंत अनुशासित और रणनीतिक है। एक विशाल समूह के भीतर संसाधनों का समन्वय, जिसमें लीजिंग, रिटेल और टेलीकॉम का एकीकरण है, यह वैश्विक स्तर पर भी दुर्लभ घटना है।
  • Image placeholder

    Pooja Mishra

    जून 4, 2024 AT 02:16
    ये सब ठीक है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ये उपकरण अंततः कहाँ जाएंगे? क्या ये ई-वेस्ट का बोझ नहीं बढ़ाएंगे? क्या कोई रीसाइक्लिंग प्लान है? नहीं? तो ये सब बस एक झूठा स्वच्छ चित्र है।
  • Image placeholder

    Khaleel Ahmad

    जून 5, 2024 AT 11:18
    मैं तो सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि अगर ग्राहक को अच्छा सेवा मिल रहा है, तो ये सौदा अच्छा है। जिसका फायदा ग्राहक को मिल रहा है, उसके बारे में ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए।
  • Image placeholder

    Anupam Sharma

    जून 7, 2024 AT 10:54
    yeh sab kuchh hai par kya ye real ya fake? kya relaince ke andar ka paisa hi ghuma raha hai? koi bhi external audit hai? koi bhi transparency? nahi? toh phir ye sab kuchh sirf marketing hai
  • Image placeholder

    avinash jedia

    जून 8, 2024 AT 04:36
    फिर से ये बात? क्या ये सौदा असल में ग्राहकों के लिए है या बस रिलायंस के बैलेंस शीट को ठीक करने के लिए? मैंने इतने सारे 'ग्राहक-केंद्रित' बयान सुने हैं, लेकिन अभी तक कोई भी वास्तविक फायदा नहीं दिखा।
  • Image placeholder

    Shruti Singh

    जून 8, 2024 AT 05:24
    ये बहुत बड़ी बात है! भारत में ऐसे सौदे ही तो आगे बढ़ते हैं। ग्राहकों को नया उपकरण, बिना झंझट, बिना दर्द - ये तो भविष्य है। बधाई हो!
  • Image placeholder

    Kunal Sharma

    जून 9, 2024 AT 20:29
    इस सौदे को देखकर लगता है कि Reliance ने एक अंतर्निहित व्यवस्था बना ली है - जिसमें वो खुद उपकरण बनाते हैं, खरीदते हैं, लीज देते हैं, और फिर उसी लीज की आय को अपने अन्य व्यवसायों में रिसाइकिल करते हैं। ये तो एक अपनी ही दुनिया है, जहाँ बाहर की दुनिया का कोई रास्ता नहीं।
  • Image placeholder

    Raksha Kalwar

    जून 11, 2024 AT 01:22
    यह एक बहुत ही स्मार्ट और योजनाबद्ध चलन है। ग्राहकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएँ, निरंतर अपडेट, और विश्वसनीय समर्थन - ये सब एक नए आदर्श की ओर ले जाता है। भारत के डिजिटल भविष्य के लिए यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • Image placeholder

    himanshu shaw

    जून 11, 2024 AT 19:29
    36,000 करोड़? ये सब बस एक बड़ा डिजिटल फैंटम है। जब तक ये उपकरण आपके घर में नहीं आते, तब तक ये सब बस बैंक अकाउंट के नंबर हैं। और जब वो आएंगे, तो क्या वो आपके लिए नया नहीं, बल्कि एक नया बंधन बन जाएंगे?
  • Image placeholder

    swetha priyadarshni

    जून 13, 2024 AT 09:08
    मैंने इस सौदे के बारे में बहुत सोचा है। जब एक कंपनी अपने अंदर के सभी व्यवसायों को एक साथ जोड़ देती है, तो यह एक ऐसा विकास है जो भारतीय उद्योग के लिए अभूतपूर्व है। लेकिन इसका एक गहरा सामाजिक असर भी है - क्या यह छोटे उपकरण निर्माताओं के लिए एक बाधा बन गया है? क्या यह बाजार में एकाधिकार की ओर ले जा रहा है? यह बात बहुत महत्वपूर्ण है। हमें इस बारे में बात करनी चाहिए, क्योंकि यह न केवल एक व्यापारिक निर्णय है, बल्कि एक सांस्कृतिक और आर्थिक रूपांतरण है।

एक टिप्पणी लिखें