ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का महत्व
ब्रिक्स पाँच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका को मिलाकर बना एक समूह है जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हर वर्ष ये देश शिखर सम्मेलन आयोजित करते हैं जहाँ ये अपनी आर्थिक नीतियों पर चर्चा करते हैं और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। इस बार का शिखर सम्मेलन कज़ान में आयोजित हो रहा है, जहाँ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन ने बड़े स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
शी जिनपिंग का स्वागत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का रूस के कज़ान हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। सफ़ेद, भूरे और नीले कपड़ों में रूसी युवा पारंपरिक परिधान में उनके स्वागत के लिए खड़े थे। इस आंतरिकता को बढ़ावा देने और परस्पर सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के प्रतीक के रूप में, उन्हें राष्ट्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। इस भव्य स्वागत का उद्देश्य दो देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना था।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का एजेंडा
इस शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिसमें आर्थिक सहयोग, डब्ल्यूटीओ सुधार, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास शामिल हैं। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच विकासशील देशों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक संयुक्त रणनीति विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा। शी जिनपिंग के लिए यह एक अवसर है कि वे न केवल चीन की स्थिति को स्पष्ट करें, बल्कि एशियाई देशों की आर्थिक चिंताओं को भी सामने लाएं।
रूस-चीन संबंधों की मजबूती
रूस और चीन के बीच मित्रता और रणनीतिक साझेदारी का विकास पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है। दोनों देश बाहरी नीतियों में एक दूसरे के सहयोगी रहे हैं, और इसी ने वैश्विक मंच पर उनकी संयुक्त प्रस्तुतियों को और मजबूत किया है। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों को नए आर्थिक और राजनीतिक अवसर प्रदान कर सकता है।
भविष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
हालांकि, ब्रिक्स का सामना कई चुनौतियों से है जिनका समाधान करना आवश्यक है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार, व्यापारिक युद्ध, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उत्पन्न संघर्ष पारस्परिक सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण इस शिखर सम्मेलन के दौरान नेता महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए एक-दूसरे के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
कुल मिलाकर, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है जहाँ वे न केवल अपनी आवाज को उठाते हैं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट हो जाते हैं। शी जिनपिंग का इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना चीन की हिस्सेदारी का एक ठोस प्रमाण है, और इससे अन्य ब्रिक्स देशों के साथ उसके संबंधों को और गहनता से समझा जा सकता है।
vikram yadav
अक्तूबर 24, 2024 AT 21:32ब्रिक्स का ये सम्मेलन असल में एक नए वैश्विक क्रम की शुरुआत है... वेस्टर्न इंस्टीट्यूशन्स के खिलाफ एक संयुक्त आवाज़। चीन और रूस का रिश्ता अब सिर्फ़ व्यापार नहीं, बल्कि एक नई सुरक्षा व्यवस्था की नींव है। भारत को भी इस बात का एहसास होना चाहिए कि हम अकेले नहीं हैं। डॉलर के ऊपर निर्भरता घटाने के लिए, रुपये-युआन के बीच ट्रेड बढ़ाना ज़रूरी है। ये सब केवल राजनीति नहीं, बल्कि आर्थिक स्वायत्तता का मुद्दा है।
Tamanna Tanni
अक्तूबर 26, 2024 AT 11:30स्वागत देखकर दिल भर गया 😊
Rosy Forte
अक्तूबर 27, 2024 AT 22:14अरे यार, ये सब ब्रिक्स की गुंजाइश नहीं, बल्कि एक नए इम्पीरियलिज़म की नींव है। चीन का नेतृत्व अब दुनिया के लिए एक नया डिज़ाइन बना रहा है-जिसमें डेमोक्रेसी का कोई स्थान नहीं, बस एक अतिरिक्त अधिकार की भावना। ये सब तो लोगों को अपने आप में बंद करने का एक नया तरीका है। हमें इसके पीछे के गहरे तांत्रिक राजनीतिक तंत्र को समझना होगा।
Yogesh Dhakne
अक्तूबर 29, 2024 AT 01:09मुझे लगता है ये सब अच्छा है। अगर दुनिया के सारे देश एक ही मानक पर चल रहे हैं, तो फिर विविधता कहाँ है? ब्रिक्स बस ये कह रहा है कि अलग रास्ते भी हैं। बस शांति से रहने दो। 🤝
kuldeep pandey
अक्तूबर 30, 2024 AT 06:52हम्म... भव्य स्वागत? अरे भाई, ये सब नाटक है। जब तक चीन तिब्बत और उइगुरों के साथ इतना ही ‘भव्य’ व्यवहार कर रहा है, तब तक ये सब बस एक बड़ा बाज़ार है। नृत्य? संगीत? अरे ये तो उनकी विज्ञापन टीम का काम है। ये जो लोग इसे सच मान रहे हैं, वो शायद अभी भी बच्चे हैं।
Hannah John
अक्तूबर 31, 2024 AT 09:26ब्रिक्स एक अमेरिकी षड्यंत्र है जो चीन को दुनिया का नया शासक बनाने की कोशिश कर रहा है। शी जिनपिंग को जो स्वागत किया गया वो रूस की तरफ से नहीं... बल्कि केंद्रीय स्टेट बैंक के बॉसेस की तरफ से हुआ। ये सब डिजिटल करेंसी के लिए तैयारी है। तुम्हारे फोन में जो ऐप है वो तुम्हारी आत्मा को ट्रैक कर रहा है। जागो।
dhananjay pagere
नवंबर 2, 2024 AT 05:07रूस-चीन संबंध अब इतने मजबूत हैं कि वो अमेरिका के सारे सैन्य अभियानों को अस्वीकार कर सकते हैं। ये नहीं कि दो देश एक साथ हैं... ये तो एक नया अलायंस बन रहा है जो डॉलर के खिलाफ एक गुप्त नेटवर्क बना रहा है। जब तक तुम बैंक में जाते हो, तब तक तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारा पैसा किसके लिए चल रहा है।
Shrikant Kakhandaki
नवंबर 2, 2024 AT 22:41ये सब बकवास है ब्रिक्स नहीं बल्कि चीन का एक नया व्यापारी घोटाला है जो दुनिया को फंसाने की कोशिश कर रहा है अगर तुम इसे सच मान रहे हो तो तुम बहुत आसानी से फंस जाओगे रूस के साथ उनका रिश्ता भी बहुत ताकतवर नहीं है वो बस अपने लिए काम ले रहे हैं और तुम सब बेवकूफ बन रहे हो