ओरेंज अलर्ट के बीच राहत
ओरेंज अलर्ट, 40-60 किमी/घंटा की तेज हवाओं का अनुमान, बिजली कड़कने की चेतावनी—फिर भी क्रिकेट ने मौसम को मात दी। IPL 2025 का ओपनर ईडन गार्डन्स में तय वक्त पर शुरू हुआ। शुक्रवार की बारिश ने पूरे ग्राउंड को कवर के नीचे कर दिया था, दोनों टीमों के प्रैक्टिस प्लान गड़बड़ा गए थे, और फैंस पूरे दिन आसमान की तरफ देखते रहे।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 21-22 मार्च के लिए कोलकाता में ओरेंज अलर्ट जारी किया था। वजह—बंगाल की खाड़ी के ऊपर एंटीसाइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बनना। शाम ढलने पर शुक्रवार को बारिश ने रफ्तार पकड़ी और टीमों को ड्रेसिंग रूम में ही रुकना पड़ा।
शनिवार को तस्वीर बदली। दोपहर 2:23 बजे तक शहर से रिपोर्ट आईं कि बादल हट रहे हैं और ईडन पर धूप झांक रही है। 3 बजे के अपडेट में साफ लिखा था—कोलकाता धूप में नहा रहा है, बस कुछ हल्के बादल तैर रहे हैं। नतीजा—टॉस 7 बजे और पहली गेंद 7:30 बजे, बिल्कुल समय पर।
दिनभर का मौसम इस तरह उतार-चढ़ाव भरा रहा:
- सुबह 9 बजे: बारिश की संभावना 75%
- दोपहर 12 बजे: संभावना घटकर 49%
- शाम 7 बजे: संभावना सिर्फ 7%—मैच टाइम
ह्यूमिडिटी 70% से ऊपर रहने की उम्मीद थी, और हवा 11-15 किमी/घंटा के बीच। ऐसी हवा पावरप्ले में स्विंग ला सकती है, लेकिन ज्यादा नमी रात में ओस बढ़ाती है—जिससे गेंदबाजों का काम मुश्किल और बल्लेबाजों के लिए स्ट्रोकप्ले आसान हो जाता है।
ईडन गार्डन्स का ड्रेनेज एक बार फिर परीक्षा में खरा उतरा। पूरे ग्राउंड पर कवर थे, सुपर सॉपर्स ने आउटफील्ड को जल्दी खेलने लायक बनाया, और पिच क्यूरेटर ने विकेट को मैच मोड में रखा। टी20 में यहां की सतह आमतौर पर ट्रू बाउंस देती है—नई गेंद थोड़ी हेल्प करती है, बाद में शॉट-मेकिंग आसान होता है। यदि ओस भारी पड़ी, तो कप्तानों के दिमाग में चेज़ का फायदा जरूर रहा होगा।
ओरेंज अलर्ट का मतलब होता है—तैयार रहो। लोकल प्रशासन, स्टेडियम मैनेजमेंट और मैच ऑपरेशंस टीम ने वैसा ही किया। स्टाफ को बढ़ाया गया, कवरिंग-क्लीयरिंग के लिए अतिरिक्त हाथ लगाए गए और लाइटनिंग प्रोटोकॉल तैयार रखा गया। थंडरक्लाउड एक्टिविटी बढ़ती तो अंपायर और मैच रैफरी खेल रोकते, लेकिन शनिवार शाम हालात नियंत्रण में रहे।
मार्च-अप्रैल में कोलकाता का मौसम चंचल रहता है। ‘कालबैशाखी’—यानी नॉर’वेस्टर—अचानक आते हैं, तेज हवा और बिजली के साथ। शुक्रवार की बारिश उसी पैटर्न का हिस्सा दिखी, पर शनिवार को सिस्टम कमजोर पड़ा और क्रिकेट प्रशंसकों ने राहत की सांस ली।
नए कप्तान, नया ओपनर, पुराने प्रतिद्वंद्वी
डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर KKR पर निगाहें थीं, और टीम का नया नेतृत्व अजिंक्य रहाणे के हाथ में है। सामने RCB, जहां कमान अब रजत पाटीदार के पास है—फाफ डु प्लेसिस की जगह नई सोच और नई ऊर्जा। ओपनिंग नाइट पर ऐसे बदलाव सिर्फ नाम नहीं बदलते, टीम की बॉडी लैंग्वेज और ऑन-फील्ड टेम्पो भी बदलते हैं।
KKR की पहचान—पावर हिटिंग के साथ मिस्ट्री स्पिन—और ईडन की कंडिशंस—दोनों एक-दूसरे के अनुकूल मानी जाती हैं। दूसरी तरफ RCB की बैटिंग डीएनए हमेशा आक्रामक रहा है; असली कसौटी डेथ ओवर्स की गेंदबाजी और इन-मिडल ओवर्स कंट्रोल रहती है। ह्यूमिडिटी और ड्यू ने अगर भूमिका निभाई तो फिंगर स्पिनर्स और स्लोअर बॉल्स का महत्व बढ़ेगा।
शुक्रवार की बारिश ने प्रैक्टिस में खलल डाला, पर टीमों ने प्लान-बी अपनाया—इंडोर ड्रिल्स, वीडियो रिव्यू, और सिमुलेशन सेशन। मैच डे पर खिलाड़ियों का फोकस—फील्डिंग स्लिपेज से बचना, ग्रिप के लिए सही टॉवल-रूटीन, और आउटफील्ड पर कंट्रोल्ड स्प्रिंट। ऐसे हालात में छोटी-छोटी चीजें—जैसे सही स्टड्स और सुपर-ड्राई टॉवल—मैच के माइक्रो-मोमेंट्स तय कर देती हैं।
ऑपरेशनल फ्रंट पर भी सब कुछ घड़ी की सुई जैसा चला। एंट्री गेट समय पर खुले, पिच कवर हटे, और किक-ऑफ एक्टिविटीज बिना रुकावट पूरी हुईं। ब्रॉडकास्ट टीमें रडार और लाइटनिंग ट्रैकर्स पर नजर रखे थीं ताकि अचानक बदलाव हो तो तुरंत प्रोडक्शन और ऑन-एयर प्लान शिफ्ट किया जा सके।
नियमों के हिसाब से अगर बारिश लौटती तो डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) लागू होता। टी20 में परिणाम के लिए हर टीम को कम से कम 5-5 ओवर खेलने होते हैं। इस संभावना को देखते हुए कप्तान टॉस पर मौसम, ओस और बादल की चाल तीनों को तौलते हैं—कब पावरप्ले में रिस्क लेना है, कब पेस ऑफ करना है, और कब लंबा गेम खेलना है।
स्टैंड्स में उत्साह साफ दिखा। सीजन की पहली रात, घर का मैदान, और बड़ा विरोधी—स्पोर्टिंग सिटी की धड़कन तेज होनी ही थी। कोलकाता में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, माहौल है; और जब आसमान ने रास्ता दिया, तो ईडन ने अपनी परंपरा निभाई—रोशनी, शोर और क्रिकेट का असली रंग।
दिन का सार यही रहा—मौसम ने डराया, पर तैयारी जीती। समय पर टॉस, समय पर पहली गेंद, और दोनों टीमों के लिए नई शुरुआत। ओपनिंग नाइट ने फैंस को वही दिया जिसकी उम्मीद थी—बिना रुकावट का बड़ा मैच, बड़े मंच पर।
Vinay Menon
सितंबर 5, 2025 AT 16:33बारिश के बीच भी मैच शुरू हुआ, ये तो असली जादू है। ईडन के ड्रेनेज और स्टाफ की मेहनत का तारीफ़ करना पड़ता है। कोई भी नहीं सोचता था कि आज गेम खेला जाएगा।
Monika Chrząstek
सितंबर 6, 2025 AT 01:53मैंने देखा था शाम को बादल धीरे-धीरे हट रहे थे... लगा जैसे आसमान भी क्रिकेट के लिए राजी हो गया 😊 बहुत अच्छा लगा कि सब कुछ समय पर हुआ। टीमों ने भी बहुत अच्छा प्लान बनाया था।
Vitthal Sharma
सितंबर 7, 2025 AT 16:19ड्रेसिंग रूम में वीडियो रिव्यू और सिमुलेशन बहुत अच्छा आइडिया था। छोटी चीजें ही बड़ा फर्क बनाती हैं।
chandra aja
सितंबर 8, 2025 AT 20:22ये सब तैयारी बकवास है। असल में IMD ने जानबूझकर ओरेंज अलर्ट घोषित किया था ताकि लोगों को डराया जा सके। बारिश रुकी नहीं, उसे बंद कर दिया गया।
Sutirtha Bagchi
सितंबर 9, 2025 AT 14:04अरे भाई ये क्या बात है?? बारिश रुकी तो भी लाइटिंग प्रोटोकॉल तैयार रखा?? क्या तुम लोगों को बिजली का डर है?? 😱
Abhishek Deshpande
सितंबर 10, 2025 AT 04:13मैंने देखा, बादलों की गति, हवा की दिशा, ह्यूमिडिटी का ट्रेंड-सब कुछ एक निश्चित पैटर्न में था। यहाँ तक कि ओस के बढ़ने की दर भी... ये सब नियंत्रित था।
vikram yadav
सितंबर 12, 2025 AT 02:59कोलकाता का मौसम तो हमेशा से ऐसा ही रहा है। कालबैशाखी के बाद अचानक धूप निकल आती है। ये कोई जादू नहीं, बस प्राकृतिक चक्र है। अगर आपने पहले भी यहाँ क्रिकेट देखा है, तो ये सब आपको परिचित लगेगा।
Tamanna Tanni
सितंबर 12, 2025 AT 17:45मैं बस यही कहना चाहती हूँ कि जब तक बच्चे खेल रहे हैं, तब तक बारिश का कोई मतलब नहीं। ये मैच बस खेल की जीत नहीं, दिलों की जीत है।
Rosy Forte
सितंबर 13, 2025 AT 04:56अरे भाई, ये सब एक बड़े नार्मेटिव फ्रेमवर्क का हिस्सा है। एक सामाजिक संरचना के भीतर, जहाँ खेल को एक अलग अस्तित्व दिया गया है-एक नए रूप की धार्मिक अनुष्ठान। मौसम की अनिश्चितता तो बस एक निर्माण है, जिसे हम आधुनिकता के नाम पर नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
Yogesh Dhakne
सितंबर 13, 2025 AT 14:12पिच की हालत देखकर लगा कि क्यूरेटर ने बस एक दिन पहले ही बैठकर निर्णय लिया होगा। बिल्कुल सही बॉउंस, बिल्कुल सही गति। ये तो आर्ट है।
kuldeep pandey
सितंबर 14, 2025 AT 14:31तो फिर भी लोगों को खुशी है। बस एक बार बारिश रुकी, और फैंस ने भगवान को धन्यवाद दिया। क्या हम सच में इतने निर्बल हो गए हैं कि एक बारिश के लिए भी धन्यवाद देना पड़े?