मार्च 2026 की शुरुआत में भारत के लाखों परिवारों के रसोईघर ठंडे पड़ गए। इरान-अमेरिकी तनाव और हॉर्मज जलडमरूमध्य का अवरोधमध्य पूर्व ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ा है। सरकार ने एक कड़ी कार्रवाई करते हुए निर्देश जारी किए हैं कि जिन घरों में पाइप लाइन प्राकृतिक गैस (PNG) कनेक्शन है, वे अब LPG सिलेंडर नहीं बुक कर सकते। साथ ही, व्यावसायिक इकाइयों की गैस आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है।
यह कोई छोटी समस्या नहीं है। हॉर्मज जलडमरूमध्य विश्व की लगभग 20 प्रतिशत खामियां तेल और 20 प्रतिशत वैश्विक LPG आपूर्ति का रास्ता है। जब यह रास्ता रुका, तो भारत जैसे देश जिसकी ऊर्जा जरूरतें बहुत अधिक हैं, वह झटका सहना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है।
बिहार से राजस्थान तक: सूखा रसोईघर
संकट की गंभीरता को समझने के लिए हमें जमीनी हालात देखने होंगे। नोएडा में 13 मार्च 2026 को सुबह 5 बजे से ही लोग कतारों में लगने लगे थे। लेकिन दर्दनाक सच्चाई यह थी कि कई लोगों ने 5-6 दिन पहले ही सिलेंडर बुक कराया था, फिर भी उन्हें डिलीवरी नहीं मिल सकी। ग्राहकों को एजेंसियों और डिपो के बीच बार-बार दौड़ना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हालात थोड़े भिन्न थे। जिलाधिकारी अनुज कुमार ने 13 मार्च को स्पष्ट किया कि जिले में किसी प्रकार की कमी नहीं है और सभी एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वहीं, बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक ब्लॉक में भारी कमी महसूस की गई, हालांकि पूरा राज्य प्रभावित नहीं हुआ। राजस्थान के जयपुर में भी रसोई गैस का संकट तीव्र हो गया।
आयोध्या में स्थिति और भी चिंतनीय थी। मंदिरों में प्रसाद बनाने के लिए गैस समाप्त हो गई थी। कई स्थानों पर गैस स्टोव बंद पड़ गए। छोटे चाय और भोजन के व्यवसाय जो सिलेंडर पर निर्भर थे, उन्हें बंद करना पड़ा। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उठा कि सिलेंडर काले बाजार में भेजे जा रहे हैं, जिसे ग्राहक नहीं पा पा रहे हैं।
Petronet LNG और कतर का जुड़ाव
आपूर्ति की चेन टूटने का मुख्य कारण Petronet LNG द्वारा कतर से गैस की आपूर्ति में वृद्धि न होना है। भारत की कुल गैस आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कतर से आता है। जब Petronet ने अपनी क्षमता बढ़ाई नहीं, तो एक घातक अंतर पैदा हो गया। उत्पादन क्षमता में वृद्धि मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, जिससे एक धाराप्रवाह आपूर्ति बाधा उत्पन्न हुई।
सरकारी अधिकारियों का दावा रहा है कि भारत के पास पर्याप्त क्रू ऑयल और LPG भंडार हैं। उन्होंने कहा कि "सब ठीक है" और पर्याप्त व्यवस्था है। लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स इन बयानों का विरोध करती हैं। उपभोक्ताओं की निराशा, लंबी प्रतीक्षा और आपूर्ति समयरेखा की अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से दिख रही थी।
संसद में विपक्ष का विरोध
इस संकट ने राजनीतिक स्तर पर भी गूंज मचा दी। संसद में विपक्षी पार्टियों ने सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने "नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब" का नारा लगाकर सरकार की नीति और प्रबंधन पर सवाल उठाए। यह नारा सरकार की उपस्थिति और जनहित में कार्य करने की क्षमता पर व्यंग्य था।
सरकार की नई संशोधन नियमावली के अनुसार, नागरिकों के पास PNG कनेक्शन होने पर उन्हें LPG सिलेंडर नहीं दिए जाएंगे और वे गैस एजेंसियों से रिफिल नहीं बुक कर सकते। यह कदम ऊर्जा संरक्षण और प्राथमिकता आधारित वितरण के लिए किया गया था, लेकिन इसने उन लोगों को प्रभावित किया जो दोनों विकल्पों पर निर्भर थे या जहां PNG सेवा अस्थिर थी।
भविष्य क्या है?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में स्थिति सामान्य नहीं होती और वैकल्पिक आपूर्ति रास्ते नहीं खुलते, तब तक यह संकट बना रहेगा। सरकार को तत्काल आपूर्ति पुनर्स्थापना या नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में मांग-आपूर्ति अंतर को संबोधित किया जा सके।
Frequently Asked Questions
PNG कनेक्शन वाले घरों को LPG सिलेंडर क्यों नहीं मिलेगा?
सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और सीमित आपूर्ति को प्रबंधित करने के लिए यह निर्णय लिया है। चूंकि PNG एक अधिक स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, इसलिए सरकार उन उपयोगकर्ताओं को प्राथमिकता दे रही है जिनके पास पहले से ही पाइप लाइन गैस कनेक्शन है। इससे LPG की मांग कम होगी और अन्य क्षेत्रों में वितरण बेहतर होगा।
हॉर्मज जलडमरूमध्य का अवरोध भारत को कैसे प्रभावित करता है?
हॉर्मज जलडमरूमध्य विश्व की लगभग 20 प्रतिशत खामियां तेल और LPG आपूर्ति का रास्ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र से काफी मात्रा में गैस और तेल आयात करता है। जब यह रास्ता रुकता है, तो आयात में कमी आती है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संकट और मूल्यों में वृद्धि होती है।
Petronet LNG ने कतर से आपूर्ति क्यों रोकी?
Petronet LNG भारत की प्रमुख गैस आयात कंपनी है जो कतर से लगभग 40 प्रतिशत गैस आयात करती है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और जहाजरानी सुरक्षा चिंताओं के कारण, कंपनी ने सावधानी बरतते हुए अपने ऑपरेशन में बदलाव किया या आपूर्ति में वृद्धि नहीं की, जिससे भारत में गैस की कुल उपलब्धता प्रभावित हुई।
क्या यह संकट शीघ्र ही समाप्त होगा?
संकट का समाधान तभी संभव है जब मध्य पूर्व में शांति स्थापित होती है और हॉर्मज जलडमरूमध्य से जहाजरानी गतिविधियां सामान्य हो जाती हैं। इसके अलावा, सरकार को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की पहल करनी होगी और घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि करनी होगी। वर्तमान में, स्थिति अनिश्चित है और उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए।